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छुटकारा सम्पादन और लागूकरण। Redemption Accomplished and Applied.
जॉन म्युरे (1898-1975) का जन्म स्कॉटलैण्ड में हुआ और शिक्षा सलास्गो, एडिनबर्ग और प्रिन्सटन में हुई। उन्होंने अपनी अधिकतर विख्यात जीवनवृत्ति (कार्यकाल) फिलाडेल्फिया के वेस्टमिन्स्टर थियोलॉजिकल सेमिनरी में प्रणालीबद्ध ईश्वर विज्ञान (सिस्टेमैटिक थियोलॉजी) की शिक्षा देने में बिताया। उनकी अन्य रचनाओं में
प्रिंसिपल्स ऑफ कंडक्टः अस्पेक्ट्स ऑफ चिब्लिकल एथिक्स और द कवनन्ट ऑफ ग्रेस शामिल हैं।
प्रायश्चित्त मसीही विश्वास का केन्द्र स्थान है। परमेश्वर का
सेंतर्मत और सम्प्रभुताकारी प्रेम छुटकारे की प्राप्ती का स्रोत है, जैसा कि बाइबल का सुपरिचित वचन (यूहन्ना 316) स्पष्ट रूप से बताता है।
प्रेरित पौलुस के समय से यह वचन विचारशील मसीहियों के लिए छुटकारे की चर्चा का आरंभ रहा है, अंत नहीं और कुछ व्याख्याकारों ने जॉन म्युरे के समान अत्यंत मर्मज्ञता के साथ या हूबहू प्रायश्चित्त से सम्बंधित बाइबल अनुच्छेदों की गम्भीरता के सार्थ छानबीन की है। उन्हें अनेकों द्वारा 1975 में उनकी मृत्यु तक अंग्रेज़ी भाषी विश्व में सर्वाधिक रूढ़िवादी (कर्मठ) ईश्वर- विज्ञानी माना जाता था।
छुटकारे के इस चिरस्थायी अध्ययन में, म्युरे ने क्रमबद्धता के साथ छुटकारे के दो पक्षों को समझाया है मसीह दवारा उसका सम्पादन और छुटकारा प्राप्त व्यक्ति के जीवन में उसका लागूकरण। भाग 1 में, म्युरे प्रायश्चित्त की आवश्यकता, स्वरूप, सिद्धता और विस्तार
पर विचार करते हैं। भाग 2 में म्युरे, बुलाहट, नया जन्म, विश्वास और पश्चाताप, धर्मीकरण, लेपालकपन, पवित्रीकरण, दृढ़ता, मसीह के साथ मिलाप और महिमान्वित किया जाना आदि से सम्बंधित पवित्र शास्त्र की शिक्षा की विचारपूर्वक व्याख्या प्रस्तुत करते हैं।
483 in stock
Originally published in 1955 and reprinted dozens of times over the years, John Murray’s Redemption Accomplished and Applied systematically explains the two sides of redemption — its accomplishment through Christ’s atonement and its application to the lives of believers.
In this theological classic Murray first explores the necessity, nature, perfection, and extent of the atonement. He then goes on to expound the biblical teaching about calling, regeneration, faith and repentance, justification, adoption, sanctification, perseverance, union with Christ, and glorification.
Concise, precise, and accessible, Murray’s classic doctrinal study, will now reach and benefit a new generation of Hindi and Telugu readers.
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